Balaji Wafers: एक किसान ने कैसे खड़ी कर दी 4000 करोड़ की कम्पनी | Fully Explained

Balaji Wafers

Balaji Wafers: ₹90 महीने की सैलरी से अपने करियर की शुरुआत करने वाले व्यक्ति को अगर 4000 करोड़ का ऑफर मिले और वह उसे ठुकरा दे, तो आप क्या कहेंगे? इस बात का संदेश अपने प्रोडक्ट की गुणवत्ता और केवल अपने व्यवहार पर आधारित बड़ी कंपनी के लिए है, जो किसी भी मान्यता को प्राप्त करने के लिए प्रयास करती है। अगर कोई भी मंच को पटकने वाले व्यक्ति को मिल जाए, तो आप क्या कहेंगे? ये वह लोग होते हैं, जिन्होंने पिछले साल 3000 करोड़ से अधिक का टर्नओवर बनाया, जो चिप्स और नमकीन बेचकर हुआ, न कि सोने और चांदी की बिक्री करके। तो यह लेख Balaji Wafers के संस्थापक चंदू भाई विरानी की और उनकी कंपनी के ताजगी से सम्मानित है, और यह उन सभी व्यक्तियों के लिए है, जो सफलता को संघर्ष और साफ नीतियों से प्राप्त करते हैं।

इस लेख में आपको ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जबरदस्त स्ट्रेटेजी सीखने को मिलेगी तो लेख अंत तक देखना अगर आप चाहते हैं कि भीड़ भाड़ बड़ी दुनिया में जहां एक एक चीज को बेचने वाले हजारों लोग हैं अपनी इस भीड़ में अलग कैसे हाटे, जिसकी नस-नस में व्यापार हो, वह है गुजराती। एक कहानी चलू होती है गुजरात के एक छोटे से गांव, धोराजी, से जो की जामनगर के नजदीक है। यहां पर पोपट रामजी भाई विरानी अपने तीन बेटों के साथ खेती किया करते थे।

1972 में इन्होंने अपनी जमीन बेची

लेकिन वहां पर काल आया, खराब मौसम की वजह से जब फसल खराब हो गई। उन्होंने कहा, “खेती में कुछ बच्चा नहीं है, जमीन बेच के कुछ और कम करते हैं।” तो 1972 में इन्होंने अपनी जमीन बेची और 20,000 रुपए मिले, जो की उस समय में बहुत बड़ी बात थी। तो इसके बाद वे क्या करते हैं? उन्होंने कहा, “चलो, फार्म इक्विपमेंट्स और खाद बेचते हैं। हमें यही आता है।” लेकिन उनके साथ थोड़ा धोखा हो गया, क्योंकि उन्हें व्यापार की नॉलेज नहीं थी। तो पैसा तो भाई, खत्म हो गया। देखा, पेट पालने के लिए और परिवार चलाने के लिए, कुछ तो करना पड़ा। अब गांव में तो कुछ है ही नहीं, और जमीन भी नहीं रही, तो इस पूरे परिवार के साथ पहुंच गए।

कुछ करना है, कुछ करना है, वो मेरी नहीं, तो वेफर सीन में कब आई यार। वो तो गेट की पर है, सिनेमा थिएटर के ओनर ने सोचा, “यार, ये तो मेहनती लोग गए रहे हैं। एक कम करते हैं, थिएटर की कैंटीन का ठेका इन्हीं को दे देते हैं।” इनको मिल गया, थिएटर की कैंटीन का ठेका। कैसे? इनकी मेहनत से, इनकी योग्यता से। अब थिएटर में, “भैया, इंटरवल में क्या बेचें?” तो इन्होंने कहा, “परिवार है।”

चंदू भाई जी खुद अपने हाथ से चिप्स बनाते थे

मसाला सेट्स बनाकर भेजता है, बेचा, प्रॉफिट भी हुआ। लेकिन एक बार में 100 मसाला सैंडविच बनाए, मां लो, कब के अब 20। जो नहीं बाइक है, वो तो खराब हो जाएंगे। तो 80 का प्रॉफिट तो 20 में चला जाएगा। तो इन्होंने कहा, “यार, मसाला चलेगा नहीं, कुछ करना पड़ेगा।” तो क्या करें? व्यूवर्स का कम करते हैं, चिप्स का कम करता है। तो उन्होंने चिप्स का एक वेंडर ढूंढ लिया। अब वो वेंडर क्या, आने में लेट हो जाए? अब बताओ, उसे सिनेमा हाल में 15 मिनट का तो इंटरनल है। अगर 15 मिनट के दौरान नहीं आता, और उसके लेट आया इंटरवल गई? अब तो बिकेगी नहीं, अब तो बड़ी रह जाएगी। तो एक वी को चेंज किया, दूसरे को चेंज किया, तीसरी को चेंज किया।

उन्होंने कहा, “यार, वेसे पर में थोड़ा पैसा बैक तो जाता है, लेकिन ये वेंडर टाइम भी नहीं आता।” एक कम करें, खुद की बना लेने। इन्होंने एक जगह कारा पे ली, और चंदू भाई जी खुद अपने हाथ से चिप्स बनाते थे। तो जब आदमी हादसा बनाता है, तो ऑब्वीजली क्वालिटी मेंटेन होती है, और उसको इतने लोगों को तो सर्व करना है, और शुरुआत में तो प्रोडक्ट बढ़िया होना ही चाहिए। इनके उत्पादों की गुणवत्ता इतनी उत्कृष्ट थी कि वेफर्स और चिप्स सुपर डुपर हिट बन गए।

लेसन नंबर 2

अगर आप कठिनाईयों का सामना करेंगे और मेहनत करेंगे, तो सफलता आपके पास होगी। कहते हैं ना, कि योग्यता के बिना भी कुछ मिलता है, लेकिन जो योग्यता होती है, वह आपको ऊपर ले जाती है। मेहनत करें, और जब भी अवसर मिले, तो उसे पकड़ें।

लेसन नंबर 3

डिसाप्पॉइंट न हों, रूटलू न बनें। किसी ने कहा कि सैंडविच तैयार हो गया है, हमारा सैंडविच छोटा है, लाभ नहीं हो रहा है। रोने का कोई फायदा नहीं, यार, अब लाभ नहीं होता तो क्या करें? कुछ और करें। चिप्स की थोक बिक्री कम की, चिप्स के विक्रेता का समय भी नहीं रहा। रोने का कोई उपाय नहीं। बहुत से लोग ऐसे होते हैं, जो कुछ ठीक नहीं होता है और फिर उन्हें ठीक करने का प्रयास भी नहीं करते। सरकार रो रही है, रोटी सिर पर नहीं है। नहीं मिला तो कुछ और करो। वो व्यक्ति मेरी बात सुन रहा है, बस उसे काम पर लगाने की जरूरत है। कोई समस्या है, तो समाधान ढूंढो। क्या आपको लगता है कि किसी ने छोटे से स्थान पर चिप्स उत्पादन शुरू किया और फिर 3000 करोड़ का व्यवसाय बना दिया? नहीं, भाई, कदम एक कदम होता है।

मशीन लाना ज़रूरी है, मशीन जब अच्छी हो, तो और अब भाई, आलू काटने की चिप्स बनाने की मशीन बहुत महंगी है। मतलब, इतनी महंगी, तो कौन ख़रीदेगा? इसलिए मशीन को बारीकी से समझा, बाजार से खुले पार्ट्स लेकर आए, खुद नहीं, मशीन बना ली, और काम चालू कर दिया। उनकी एक फिलॉसफ़ी है, और आप नोट करें, उन्होंने कहा मशीन का इन्वेस्टमेंट हमेशा बेस्ट इन्वेस्टमेंट होता है। एक बार पैसा लगा दो, 24 घंटे बिना चिक-चिक करें, कम करती है मशीन। आदमी की चिट्ठी, आदमी के नख़रे, आदमी की छुट्टी, मशीन की थोड़ी है लेसन नंबर 4। सबसे इम्पॉर्टेंट, सबसे लर्न, एलिगेशन अपना काम है, ना छोड़ना सीखो, दूसरों पे।

एक्सपेंशन

अगर चंदू भाई कहते हैं, “नहीं चिप्स”, तो मेरे से ही बढ़िया बंटी है, बाकी को दूंगा तो बिगाड़ देंगे। तो आज भी चिप्स की दुकान पे बैठे होते, तो कौन जानता? चंदू भाई को इन्होंने कहा, “नहीं, घरवालों को डेलिगेशन किया जब घरवालों को डालेगी, क्या, रोज़ के चिप्स बनाने की झंझट से मुक्त हुए। तभी तो बाजार गए, तभी तो कम फैलाया, तभी तो मशीन आई, तभी तो आइडिया आया। तो जब तक तुम दुकान पे गले पे बैठे रहोगे, बैठे र जाओगे, मेरे दोस्त, डेलिगेशन करो, बंदों को किसी को डालो, पूरा बाजार आपके इंतज़ार में खड़ा है। यार, अब बात करते हैं एक्सपेंशन की, देखो भाई।

साहब, मशीन इनके पास आ गई थी, प्रोडक्ट इनका था, कस्टमर इनके थे। आपको इस सामान्य आदमी होता, तो खुश हो जाता, जिंदगी में इतना प्रॉफिट आता है, दाल-रोटी चल रही है, का लिया, पी लिया, मजा आ गया। छोटी सी दुकानों पे दाल-रोटी के लिए बैठे हैं, इन्होंने कहा, “दाल-रोटी के लिए थोड़ी जिंदा कर रहा है।” वही तरीके इन्होंने कम में लिया, तरीका नंबर एक होता है। आप ज्योग्राफी के लिए एक्सपेंशन करते हो,

पांच स्टेट में तो इनकी लीडरशिप

आप एरिया को बढ़ाते हैं अब जो बड़ी-बड़ी कमियां मंच होती हैं, उनके पास तो पैसा भी ज्यादा आदमी भी ज्यादा, तो एक साथ पूरे भारत में एक साथ पांच स्टेटमेंट में कूद जाते हैं। इन्होंने कभी आदमी भी कम है, पैसा भी कम है, तो एक बार में एक किला बनाऊंगा, एक बार में एक मार्केट, पहले गली पे, दूसरी गली पे, 10 गली पे, 20 गली। तो धीरे-धीरे मेरा केला बनाऊंगा और उसको मजबूत करूंगा। तो पहले धीरे-धीरे उन्होंने पूरे गुजरात को कर किया, गुजरात का 90% मार्केट शेर इनके हाथ में, हर 100 मी की डिस्टेंस पे आपको बालाजी का प्रोडक्ट मिल जाएगा। उसके बाद उससे एड के राजस्थान था, वहां गए, एड के महाराष्ट्र था, उसमें गए, गोवा में गए, मध्य प्रदेश में गए। उन चारों स्टेट में 70% से ज्यादा मार्केट में कब्जा कर लिया। और अब धीरे-धीरे ये 11 से ज्यादा स्टेट में मौजूद हैं। पांच स्टेट में तो इनकी लीडरशिप है, बाकी साथ स्टेट में धीरे-धीरे प्रेजेंट सब बड़ा रहे हैं।

लेसन नंबर 5

जितना ज्यादा घूमेगी उतना ज्यादा चलेगी, गे को कुत्ते से बंद दिया वो वही वही घूमती है, तो उतना ही चलेगी। अब एक दुकान, छोटी सी दुकान, छोटा सा ऑफिस, लेक छोटे से शहर की कर अगली कर मुलाई सर करते र जाओगे, भैया बाहर निकालना पड़ेगा। ज्योग्राफिकल एक्सपेंशन करो, सेकंड जो एक्सपेंशन होता है, एरिया के बाद होता है। प्रोडक्ट में एक्सपेंशन की सिर्फ चिप्स बेच-बीच के थोड़ी गाड़ी चलेगी।

जैसा देश, वैसा भेस। अगर तुम पूरे गुजरात में काम कर रहे हो या किसी अन्य राज्य में, तो हर राज्य के लोगों की अलग-अलग पसंद होती है। हर राज्य में भी अलग-अलग लोगों का अलग-अलग चयन होता है। इसलिए, इन्होंने अपने प्रोडक्ट को 23 विभिन्न प्रकार की नमकीन के रूप में पेश किया। खट्टा, मीठा, फलाहारी, नमकीन चना, जोर ग्राम – ये सभी प्रकार की नमकीन उपलब्ध हैं। फिर भी, वे उन्हें 14 अलग-अलग वैरायटी में भी बेचते हैं। चाहे तो नमक वाली, मिर्ची वाली, नींबू वाली, बनाना वाली, पुदीना वाली – जैसा भी चाहो, वे उपलब्ध हैं।

उनके पास पश्चिमी स्नैक्स के लिए भी 14 विभिन्न प्रकार के प्रोडक्ट हैं। वे नूडल्स भी बेचते हैं और उनकी 50 से भी अधिक वैरायटी उपलब्ध है। उनके प्रोडक्ट की गुणवत्ता बाजार में सर्वोत्तम है। उनके पैकेट में लगभग 78% खर्चे रो मैटेरियल का होता है, जिसका मतलब ₹10 की चीज में ₹7.80 का माल लगा होता है। इससे उनकी उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।

रोजाना 12% मार्जिन मिलता

उनकी औसत लाभ दर 65% है, जो बाजार के मानक से 13% अधिक है। इससे साफ है कि वे उनके उपभोगकर्ताओं को अधिक बेहतर उत्पाद प्रदान करते हैं। यह देखा गया है कि जब वे 13% अधिक माल देते हैं, तो उनका लाभ कम नहीं होता है। वे अपने खर्च को संभालकर 9-10% पर काम करते हैं और उनका मार्जिन 10-12% होता है। इससे उन्हें रोजाना 12% मार्जिन मिलता है।

यह सामग्री सामग्री सही रोशन और महत्वपूर्ण है, क्योंकि जहाँ अन्य कंपनियों का रोशन 15 है, उनका रोशन 25 है। हर 15 दिन में उनकी माल तैयार होती है और उसे बाइक से भेज दिया जाता है। यह मतलब ₹1 करोड़ की माल को उन्होंने ₹25 करोड़ में बेच दिया। ऐसा कई बार होता है।

ध्यान दें कि भारत में किसी भी क्षेत्र में एक ही उत्पाद के आधार पर आप नहीं चल सकते, क्योंकि उस उत्पाद को गलियों में, मोहल्लों में, और लोगों को पसंद किया जाता है। लेकिन, अगर आप विस्तार करते हैं, तो आपको विभिन्न वेरायटीज को प्रस्तुत करना पड़ेगा, इसलिए उत्पाद में नवाचार अनिवार्य है।

4000 करोड़ का इनका ऑफर दिया था: Balaji Wafers

आपका निर्मार्जित उत्पाद 15% है और उसकी बिक्री में 3 महीने लगते हैं, तो आप बहुत कम कमाई नहीं करेंगे। लेकिन, यदि आपकी मार्जिन मान्यता 5% है और दैनिक बिक्री होती है, तो आप अधिक कमाएँगे। जब आप एक सामान्य बाजार में होते हैं जहाँ सभी एक ही प्रकार के उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं, तो आपका अंतर्निहित मूल्य प्रस्ताव बहुत महत्वपूर्ण है।

आपको अपने प्रतिस्पर्धियों से अलग होने का तरीका बताना बहुत अहम है। उनकी पहचान क्या है, उनके पास विविधता कितनी है, जबकि अन्यों के पास केवल 5, 8 या 10 विविधताएं हो सकती हैं, तो उनकी 50 से अधिक विविधताएं होती हैं। इसके अलावा, उनका मूल्य सस्ता होता है, यानी जितने रुपये में खरीदा जाता है, उससे कम में बेचा जाता है, और या फिर जितने रुपये में खरीदा जाता है, उससे अधिक बेचा जाता है। तीसरा, उनका प्रतिस्पर्धी, Lays, कोई अभिशप्त से कम नहीं है। जब किसी के पैकेट में हवा भरी होती है, तो उन्होंने अपने नारे को क्या बनाया है, इसका मतलब है कि उन्होंने हवा की मात्रा कम रखी है,

इससे अधिक फ्लावर्स यानी हवा बोल के उसकी कंप्यूटर की भी ऐसी तैसी कर दी खुद का प्रचार भी कर दिया और फ्लावर्स खुद की Usp भी दिखा दे और इसको जबरदस्त तरीके से मार्केट किया भैया पेप्सी की जलन 19 हो गई थी पेप्सिन पर कैसे कर दिया की भैया तुम तुम्हारा डिजाइन कॉपी करते हो और हो सकता है इन्होंने किया भी होगा भैया थोड़ा बहुत करते हैं बॉम्बे हाय कोर्ट ने पेप्सी के फीवर में फैसला दिया की नहीं भैया बालाजी तुमने कॉपी तो किया है तो इनको अपने डिजाइन बदलना पड़े| कौन बचाने का बट भैया डिजाइंस से ज्यादा नाम से पहचान होता है बालाजी सबको याद था बालाजी दे दो बालाजी दे दो तो भैया डिजाइन बदलने के बाद भी इनको कोई फर्क नहीं पिया|

8,00,000 किलो वेफर्स और 10 लाख किलो नमकीन प्रति दिन: Balaji Wafers

उसे समय जब इनकी सेल हजार करोड़ के आसपास थी बहुत सारे लोग इनको खरीदने के लिए भी आए अब इन्होंने नाम तो नहीं बताया पर जी तरह से मुझे रहा है इनका सबसे बड़ा कंपटीशन है और इस को इसे खतरा है तो उन्होंने 4000 करोड़ का इनका ऑफर दिया था पर इन्होंने बात बोली जो मेरे दिल को ऊ गई उन्होंने कहा मेरी कंपनी मेरे बच्चों के समाज है उन्होंने मेरे बच्चे नहीं भेजता अब आपके मां में सवाल होगा आखिर पेप्सी देता क्या है भैया अरे ली और गुरु करें इस के तो है इनके एक्सपेंशन की एक और शानदार स्ट्रेटजी प्रोडक्शन कैपेसिटी भैया जब तुम बनोगे ही नहीं तो बेचोगे कैसे तो 2003 से यह दुनिया हाथ से चिप्स बना रही थी इन्होंने तब से मशीन कम में ले राखी है और इनका मशीनों का जबरदस्त प्लेन है आज की रेट में ये 8,00,000 किलो वेफर्स और 10 लाख किलो नमकीन प्रति दिन बना सकते हैं

इनके कर प्लांट है तीन गुजरात में है एक इंदौर में है एक अप में भी ए रहा है और एक का रहे हैं जिस-जिस राज्य में हम घुसेंगे वहां वहां एक बड़ा प्लांट डालेंगे ताकि हमारा लॉजिस्टिक का खर्चा बच्चे और वहां पे हम लोगों को जल्दी से और हमें उनका जनता का प्यार चाहिए, मार्केट शेर नहीं। बोलने की टेक्निक अच्छी है, भैया चाहिए। अनूप को मार्केट शेर लेकिन बोलने का स्टाइल अच्छा लगा तो, यह थी कहानी।

भारत की दूसरी सबसे बड़ी पोटैटो चिप्स कंपनी (Balaji Wafers) की पहली है। तो ऑब्वीजली पेप्सी को कम्पनी को पार्टनर बनाए रखने के कारण यह उनके लिए लाभकारी है। पूरे भारत में इसकी दिल्ली लेवल पर्चटान की जाती है। यह एक क्षेत्रीय कंपनी है, लेकिन यह पश्चिमी बाजार का सबसे बड़ा स्थानीय खिलाड़ी है। पिछले साल में यहने ३००० करोड़ से अधिक का व्यापार किया। यह ११ राज्यों में उपस्थित है। अभी तक भारत में बहुत कुछ बाकी है, कई देशों में इसने निर्यात भी शुरू कर दिया है। लेकिन Balaji Wafers की कहानी की तो मुझे लगता है अगले १० साल में एक नया हल्दीराम देखने को मिल सकता है।

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